प्रणाम
सनातन संस्कृति मे किसी का भी अभिवादन प्रणाम के उद्बोधन के साथ किया जाता है देव भाषा संस्कृत मे अभिवादन को प्रणाम से किया जाता रहा है देवताओ ने भी एक दूसरे का सम्मान प्रणाम के साथ किया जाता था जिसका आज के समय मे अलग अलग भाषा मे अलग अलग ढंग से लिया जाने लगा जो मूल प्रणाम को ही उधगोष् करता है इसलिए हमे उसी सनातन प्रणाम की और चलना चाहिए जो हमारी संस्कृती हुआ करती थी इश्लिये हमे सनातन प्रणाम संस्कृती की और फिर से चलना चाहिए !! प्रणाम!!
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